मैं तो संग जाऊं बनवास

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो संग जाऊं बनवास,

स्वामी ना करना निराश,

पग पग संग जाऊं जाऊं बनवास,

हे मैं तो संग जाऊं बनवास,

उपर है अग्नि की छतरी नीचे तपती बाली,

पाँव में पड़ेंगें छाले ना जाओ बनवास ,

हे मैं तो संग जाऊं बनवास,

मैं तो संग जाऊं बनवास,

तुम हो सूर्यवंशी स्वामी रखो अपनी छाया,

छाव में चलूँ तुम्हारी तुम ही मेरी माया ,

मैं तो संग जाऊं बनवास,

मैं तो संग जाऊं बनवास,

जंगल बन मे घूमे हाथी भालू शेर और हिरना,

नारी हो तुम डर जाओगी,

ना जाओ बनवास ,

हे मैं तो संग जाऊं बनवास,

मैं तो संग जाऊं बनवास ,

तुम तो योद्धावीर हो स्वामी तुम ही रक्षा करना,

बाण तुम्हारे काँधे सोहे संग हो तो क्या डरना,

मैं तो संग जाऊं बनवास,

स्वामी ना करना निराश,

पग पग संग जाऊं जाऊं बनवास,

हे मैं तो संग जाऊं बनवास ,

मैं तो संग जाऊं बनवास,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।