मैं हां तेरे चरना दी धूल बाबा लाल जी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मैं हां तेरे चरना दी धूल बाबा लाल जी

करियो न अपने तो दूर बाबा लाल जी,

जय लाल लाल लाल लाल लाल,

मैं दर तेरे ते आंदा रेह्न्दा झोलियाँ खैरा पांदा रेह्न्दा,

झोलियाँ खैरा हूँ पाओ बाबा लाल जी,

मैं हां तेरे चरना दी धूल बाबा लाल जी

नाम तेरे दा मंदिर बनावा ओथे हर साल दूज मनावा,

मेरा तुसी ओथे गुण पाओ बाबा लाल जी,

मैं हां तेरे चरना दी धूल बाबा लाल जी

कदे मेरे तो मुख न मोड़ी ना मेरा विशवाश न तोड़ी,

तेरे नाल जुड़ियाँ बजूद बाबा लाल जी,

मैं हां तेरे चरना दी धूल बाबा लाल जी

कार्तिक शिवम् तेरे गुण गावे,

हर दम तेरा नाम ध्यावे,

मैनु हूँ अपना बनाओ बाबा लाल जी,

मैं हां तेरे चरना दी धूल बाबा लाल जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।