तू ही तू ही तू ही तो मेरा है नन्द नन्दन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तू ही तू ही तू ही तो मेरा है नन्द नन्दन,

मैं भी मैं भी मैं भी तो हु तेरा नन्द नन्दन,

तू ही मेरा तू ही मेरा स्वामी नन्द नन्दन,

तू ही मेरा तू ही मेरा सखा नन्द नन्दन,

तू ही मेरा तू ही मेरा सूत नन्द नन्दन,

तू ही मेरा तू ही मेरा पिये नन्द नन्दन,

तू ही मेरी प्रति मति रति नन्द नन्दन,

तेरे सिवा मेरा कोई नहीं नन्द नन्दन,

तू ही मम माता पिता भारता नन्द नन्दन

तेरा भी कहा हुआ है यह नन्द नन्दन,

तू ही तू ही तू ही तो मेरा है नन्द नन्दन.....

माना मैं हु अति ही पतित नन्द नन्दन,

तू भी तो पतित पावन नन्द नन्दन,

माना मैं हु अति दीन हीं नन्द नन्दन,

तू भी तो है दीना नाथ मम नन्द नन्दन

माना मैंने पिछला बिगाड़ा नन्द नन्दन,

अगला तो अब तो बना दे तू नन्द नन्दन

माना मैं हु सब विधि दोषी नन्द नन्दन,

तू तो है किरपालु किरपा करो नन्द नन्दन,

तू ही तू ही तो है मेरा नन्द नन्दन...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।