गुरु जी तेरे नाम तो बिना

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॥ पावन पाठ ॥

गुरु जी तेरे नाम तो बिना,

साहनु कौन गरीबा नु जाने,

गुरु जी तेरे नाम तो बिना

केहड़ा दुखियाँ दा दर्द पहचाने,

गुरु जी तेरे नाम तो बिना

नाम तेरे दिया सब बड़याईया,

मेहर किती तू सच्या साइयाँ,

पापियाँ उते कर्म कमाया,

अव गुण ताहि चरनी लाया,

लाउने गल कीने तू निमाने,

गुरु जी तेरे नाम तो बिना

असि अनजान सी करमा मारे,

बक्श लिया तू बक्शन हारे,

नरका दी असि विष दे कीड़े,

पाप पलिटी तन ते लीडे,

कीने मल मल दाग छिलौने,

गुरु जी तेरे नाम तो बिना

असि मन मुख सी पापी बंदे,

तू मंदिया तो किते चंगे,

साढ़े मंदडे हाल तू वेखे,

स्वाश जीवन दे लाये लेखे,

साहनु जग उते कौन सयाने,

गुरु जी तेरे नाम तो बिना

नाम तेरे दे भरे खजाने लखा तारे रंक ते राणे,

तेरी दया जिस था हो जावे ओ प्राणी दुःख कैसे पावे,

तेरा सुख दुनिया विच वारे,

गुरु जी तेरे नाम तो बिना

सतगुरु मिलिया सचखंड मिलिया दर्शन करके तन मन खिलियाँ,

शब्द शरूपी साडा मालक तू सारे जीवा दा पालक,

साढ़े किसने सी भाग जगाने,

गुरु जी तेरे नाम तो बिना

अमृत वेले जाग सवेरे जपिये नाम गुरु जी तेरे,

तू ही रोम रोम दे अंदर साफ़ किता तू मन दा मंदिर,

नहीं लभने गुप्त खजाने,

गुरु जी तेरे नाम तो बिना

साद संगत दी करिये सेवा,

संगत सेवा मीठा मेवा,

कोमल दास नु चरनी जोड़ी,

कच्ची प्रीत जगत तो तोड़ी,

झूठा जगत ते झूठे याराने,

गुरु जी तेरे नाम तो बिना

नाम तेरे दियाँ सब वाड्याइयाँ,

मेहर किती तू सच्या साइयाँ,

पापिया उते कर्म कमाया,

अवगुण ताहि चरनी लाया,

असि गाल नाल कीने सी निमाने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।