मेरे बावा लाल जी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे बावा लाल जी, मेरे बावा लाल जी

मेरे बावा लाल जी, मेरे बावा लाल जी

ताने मेहनेया सताई, दाता दर तेरे आई

मैनु चरना नाल लौ तुसी ला लाल जी

पर किसे वी ना फड़ी मेरी बाह लाल जी

सारे जग नु लिया मैं आजमा लाल जी

पर किसे वी ना फड़ी मेरी बाह लाल जी

महिमा सुन के मैं तेरे ध्यानपपुर दी

मैं ते ओसे वेले दाता नंगे पैरी तुर पयी

तैनू केहन्दे बावा लाल, तू है बड़ा ही दयाल

बेदी बन्ने मेरी तुसी देओ ला लाल जी

पर किसे वी ना फड़ी मेरी बाह लाल जी

बावा दोवें हथी सुनेया तू वंडदा है दातां

ओथे माँवां नु है पुत्तां दिया मिल दिया सौगाता

तेरे दर ते फकीरा, कडा नक्क नाल लक़ीरां

मेरी खली देओ पुत्त पा लाल जी,

पर किसे वी ना फड़ी मेरी बाह लाल जी

असी कोई नहीं वैद ते हकीम छड़ेया

‘कंगजीत’ ताहि लोकां छज पा पा छटेया

कोई दिसदा ना चारा, बस तेरा ही सहारा

ला के थक गए आ असी पूरी वाह लाल जी

पर किसे वी ना फड़ी मेरी बाह लाल जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।