गुफा दे विच है बैठे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गुफा दे विच है बैठे सिद्ध नाथ पौणाहारी,

बालक नाथ योगी कहन्दे सारी दुनिया जिस ने तारी,

गुफा दे विच है बैठे.......

सिर ते सुनहरी जटावा मुख नूर चमका मारे,

गल में सिंगी साजे आकाश में चमके तारे,

धुना लगा के बैठे करे मोर दी सवारी,

बालक नाथ योगी कहन्दे सारी दुनिया जिस ने तारी,

गुफा दे विच है बैठे.......

मावा नु पुत्र देवे भेना नु वीर मिलावे,

हर आस पूरी करदे श्रदा नल जो भी आवे,

ढोल चिमटे छेने वजदे आई संगत दर ते भारी,

बालक नाथ योगी कहन्दे सारी दुनिया जिस ने तारी,

गुफा दे विच है बैठे.......

तेरे द्वार आगे योगी आके मोर पेहला पाउंदे,

सुख वंदन दास वरगे कई भजन गांदे,

तेरी मोहनी मूरत प्यारी कलयुग दे अवतारी,

बालक नाथ योगी कहन्दे सारी दुनिया जिस ने तारी,

गुफा दे विच है बैठे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।