कौन जाने गुण तेरे जोगियां

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कौन जाने गुण तेरे जोगियां कौन जाने गुण तेरे,

झोलियाँ भर भर भंडी जावे दुःख हर देयो मेरे,

कौन जाने गुण तेरे जोगियां कौन जाने गुण तेरे,

पार्वती माता कोल आये शिव शंकर दे दर्शन पाये,

माँ धर्मो दा कर्जा दें ले शाहतलाइयाँ धुनें लाये,

लसियां रोटियां कड़ दिखाइयाँ गल उड़ गई चार चुबेरे,

कौन जाने गुण तेरे जोगियां कौन जाने गुण तेरे,

गो गरीब दी रक्शा किती त्यागी सी तुसा ने मोह माया,

माता पिता नु छड़ के आये बालक ब्रह्मचारी अखवाया.

घाटा कदे ना पवे ोहना नु मंदे जेहड़े,

कौन जाने गुण तेरे जोगियां कौन जाने गुण तेरे,

गोरख आज मत लेन सी आया उसदा भी तू सी मान गवाया,

सोनी पटी वाला कहंदा तेरा अंत किसे न पाया,

मोर सवारी मार उडारी गुफा ते ला ले डेरे,

कौन जाने गुण तेरे जोगियां कौन जाने गुण तेरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।