जो स्वर्ग देखना चाहते है

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॥ पावन पाठ ॥

जो स्वर्ग देखना चाहते है,

वो कम्पिल जी आ जाते है,

जिन प्रभु की नगरी कम्पिल जी,

जिन प्रभु यहाँ मिल जाते है,

यहाँ प्रभु विराजे कण कण में वो कष्ट निवारे इक शन में,

वो वसे यहाँ रोम रोम वो शिखर में है जड़ में है,

जो मन में उनका ज्ञान धरे जिनप्रभु उन्हें मिल जाते है,

जिन प्रभु की नगरी कम्पिल जी,

जिन प्रभु यहाँ मिल जाते है,

जिन प्रभु का सच्चा दर है ये,

प्रभु विमल नाथ का दर है ये,

जग पूज रहा जिन मंत्रो से संगीत का ऐसा स्वर है ये,

जिन प्रभु की नगरी कम्पिल जी,

जिन प्रभु यहाँ मिल जाते है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।