हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा,

तेरा पीर निगाहें डेरा साहनु कदो भुलावे गा,

साहनु कदो भुलावे गा साढ़े घर कद आवे गा,

हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा,

तेरे नाम दे चिराग मैं जगावा दातिया,

कर साढ़े उते सूखा दियां छावा दातिया,

हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा,

झंडा चादर बनाई पीरा तेरे वास्ते,

घर चौंकी मैं लवाई पीरा तेरे वास्ते,

हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा,

हर वीरवार दर ते भुलावी दातिया,

साड़ी झोली विच खैरा तू पावी दातिया,

हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा,

पकी पौड़ी ते सवार होके आजा दातिया,

रघु पके न भी दर्श दिखा जा दातिया,

हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा,

पिन्दु तेलु तेला वाले लयाजा लेके ाउन गे,

सोनी पटी वाले दा अखाडा भी लवाऊं गे,

हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।