जे जोगी दा नजारा देखना

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॥ पावन पाठ ॥

बेह जा कुली तू जंगल विच पा के,

जे जोगी दा नजारा देखना,

राजे भरथरी वांगु मेहला न ठुकरा के,

जे जोगी दा नजारा देखना,

इस दुनिया ने जीन तनु देना नि

प्याला सबरा दा पीन तनु देना नहीं,

धूना बाबा जी दे नाम वाला ला के,

जे जोगी दा नजारा देखना,

बेह जा कुली तू जंगल विच पा के,

मोह माया वाले बंधना न तोड़ के,

ओ साहा वाली डोर बाबा जी न जोड़ के,

सच्चे नाम वली ज्योत जगा के,

जे जोगी दा नजारा देखना,

बेह जा कुली तू जंगल विच पा के

आके गोरकख ने जोगी न अजमाया सी,

नजारा बाबा जी ने उस नू दिखाया सी,

उड़्या मोर ते उडारी ला के,

जे जोगी दा नजारा देखना,

बेह जा कुली तू जंगल विच पा के

लगाम पिंड बुंट्टी राया दा जो रेह्न्दा है,

हर दिन नाल न बाबा जी दा लेंदा है,

सोनी पटी वाला सच्ची गल कहंदा है,

रखे दिल विच बाबे नू वसा के

जे जोगी दा नजारा देखना,

बेह जा कुली तू जंगल विच पा के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।