नहोन्दा फिरे तीरथा ते

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे अन्द्रो मैल न जावे नहोन्दा फिरे तीरथा ते,

सच्चे दिलो न तू बाबे तू ध्यावे नहोन्दा फिरे तीरथा ते,

स्वासा दी माला विच नाम वसा ले तू,

दर ओहदे जाके दर्शन रब दे पा ले तू,

नाम जपे जेहरा रब नु पावे,नहोन्दा फिरे तीरथा ते,

बाबे नु धयाके बूहे स्वर्गा दे खुल्दे,

बन गये करोडा पति जेहड़े सी रुल्दे,

मन भटकदा वस च न आवे,

नहोन्दा फिरे तीरथा ते

आया इस जग ते जो इक दिन जाना है,

जप्या जो नाम ओहि कम तेरे ओना है,

तनु गल क्यों न समज आवे,

नहोन्दा फिरे तीरथा ते

सोनी पटी वालेया वे मन समजा ले तू

बाबे बिन कोई नी तेरा लख आजमा ले तू,

काटो दर दर धके टेड़े खावे,

नहोन्दा फिरे तीरथा ते

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।