बोल मेरी मैया तुझे कैसे मनाऊ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

गा के मनाऊ या नच के मनाऊ,

बोल मेरी मैया तुझे कैसे मनाऊ,

ताली बजाऊ या ठुमका लगाऊ,

बोल मेरी मैया तुझे कैसे मनाऊ,

तू जो कहे तेरा मंदिर बनाऊ जैसे कहे तो तेरा बांग्ला सजाऊ,

पर ऊंचा पर्वत कहा से मैं लाऊ अरे,

बोल मेरी मैया तुझे कैसे मनाऊ......

तेरी सवारी को थोड़ा मनाऊ,

बाकी जो चाहे वो भी मैं लाऊ,

पर शेर मियां कहा से मैं लाऊ,

बोल मेरी मैया तुझे कैसे मनाऊ,

तेरे नहाने को कवाड़ी बनाऊ,

जितने कहे ताले उतने खुदाउ,

पर वाह में गंगा कहा से लाऊ,

बोल मेरी मैया तुझे कैसे मनाऊ,

तू जो कहे वैसी चुनर मैं लाऊ,

ध्वजा नारियल कितने चड़ाउ,

अकबर जैसे छतर कैसे लाऊ,

बोल मेरी मैया तुझे कैसे मनाऊ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।