बैठे माँ ऊंचे सिंगसन

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बैठे माँ ऊंचे सिंगसन कइया चुनड़ी ओडवा जी,

चुनरी ओडन आजा दादी भक्ता बीच भुलावा जी,

समजो तो यो परिवार है थारो,

इतनो तो माँ अधिकार है बहारो,

समजा मावड़ी ने थाने इहि जोर चलावा जी,

चुनरी ओडन आजा दादी भक्ता बीच भुलावा जी,

माँ से मिलने की अमावस है माँ,

बेटे कोई नहीं ध्यावस है माँ,

हिवड़ो धीर न धारे माँ कइयाँ दर्शन पावा जी,

चुनरी ओडन आजा दादी भक्ता बीच भुलावा जी,

टाबरियां को दिल मत तोड़ो आज तो यो सिंगासन छोड़ो,

मैया चाँदी की चौंकी पे थाने आज बिठावा जी,

चुनरी ओडन आजा दादी भक्ता बीच भुलावा जी,

वनवारी चुनड़ी चढ़ जागी और मेहँदी की मेहँदी बन जायेगी,

जब तक सूखे न ये मेहँदी थारा लाड लड़ावा जी,

चुनरी ओडन आजा दादी भक्ता बीच भुलावा जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।