भगता दी तेरे हाथ डोर बाबा जी

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॥ पावन पाठ ॥

आवा गे गुफा दे उते सदे जदो योगियां तू ,

भगता दी तेरे हाथ डोर बाबा जी,

तेरे बिना ना साडा न कोई होर बाबा जी,

आवा गे गुफा दे उते सदे जदो योगियां तू ,

मीठे मीठे लेके आये रोट बाबा जी,

रोटा नु ला लो भोग बाबा जी,

बोलदे जैकारे भेटा गाउँदे असि आये हां,

सोहने सोहने झंडे नाले छेले भी लैआए हां,

नाम वाली चढ़ी जन्दी लोर बाबा जी,

भगता दी तेरे हाथ डोर बाबा जी,

भरियाँ सरावा सब संगता दे नाल जी,

भजदे ने ढोल शेने हुंडी जय जय कार जी,

पेला पाउंदे गुफा उते मोर बाबा जी,

भगता दी तेरे हाथ डोर बाबा जी,

महरा दया सैयां निगा महरा वाली मार दे,

सोनी पटी वाले वांगु साहनु भी तू तार दे,

गल विच पला पाके दर ते खड़े आ हाथ जोड़ बाबा जी,

भगता दी तेरे हाथ डोर बाबा जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।