साई की धुन मुझे साई की धुन है

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॥ पावन पाठ ॥

साई की धुन मुझे साई की धुन है,

बाबा पसंद मुझे बाबा पसंद है,

किसी के कान में हीरा किसी के हाथ में हीरा,

मुझे हीरे से क्या लेना मेरा तो साई है हीरा

ताज अधूरा रहता है उसको तो हीरा सजाता है,

जिसपे कोई मुसीबत आये मेरा साई उसको बचाता है,

मुझे दुनिया ने ठुकराया मैं साई दर पे हु आया ,

मुझे साई से मतलब है, मेरा तो साई है हीरा

साई की धुन मुझे साई की धुन है,

बाबा पसंद मुझे बाबा पसंद है,

दिल का रिश्ता बनता है ऊँगली में अंगूठी पहनो,

जिस में प्यार नहीं होता तुम छोड़ दो ऐसे गहनों को,

मेरा तो प्यार है साई मेरा शृंगार है साई,

मुझे जुगनू से क्या लेना मेरा तो साई है हीरा,

साई की धुन मुझे साई की धुन है,

बाबा पसंद मुझे बाबा पसंद है,

शिरडी वाल साई नाथ का सारा जग ही दीवाना है,

उसकी दया से कम नहीं होता ये तो ऐसा खजाना है,

सितारे रौशनी मांगे नजारे चांदनी मांगे,

मुझे जलवो से क्या लेना,

मेरा तो साई है हीरा,

साई की धुन मुझे साई की धुन है,

बाबा पसंद मुझे बाबा पसंद है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।