जोगी मेरा जोगी मेरा

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॥ पावन पाठ ॥

जोगी मेरा जोगी मेरा जोगी मेरा पौनाहारी मेरा,

अर्शो आ के कलयुग दे विच बह गया लाके डेरा,

जोगी मेरा जोगी मेरा जोगी मेरा पौनाहारी मेरा,

बड़ा छोटा ना ओ परखे ना ही कोई बेगाना,

कर्ज उसदे पुरे करदा जो भी उसदा दीवाना,

जोगी वरगा होर न कोई घुमदा चार चुफेरा,

जोगी मेरा जोगी मेरा जोगी मेरा पौनाहारी मेरा,

दुखा नु ओ दूर है करदा सामने बेठ सुना देयो,

ना ओ मंगदा रिशवत कोई सचा प्यार दिखा देयो,

चरना दे नाल लाके जोगी करदा दूर हनेरा,

जोगी मेरा जोगी मेरा जोगी मेरा पौनाहारी मेरा,

लोकी कहंदे बालक उसनू शक्ति कोई न जाने,

रहमती दे रंग चढ़ जांदे जो बन दे आन निमाने,

शिव भोले तो शक्ति पा के गुफा च ला लिया डेरा,

जोगी मेरा जोगी मेरा जोगी मेरा पौनाहारी मेरा,

योगी आगे गोरख वर्गे सारे आके झुकदे ने,

भुत प्रेत न मुहरे आंदे योगी कोलो लुकदे ने,

तू भी केवल झुक जा वेह्डा वने लाऊ तेरा,

जोगी मेरा जोगी मेरा जोगी मेरा पौनाहारी मेरा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।