जेहड़े माँ नाल करदे प्यार भंगड़ा पावन गये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जेहड़े माँ नाल करदे प्यार भंगड़ा पावन गये,

नच नच के चावा नाल ख़ुशी मनावन गये,

जेहड़े माँ नाल करदे प्यार भंगड़ा पावन गये,

दिल विच किना चा है लुकियाँ माँ नु आज विखोना है,

माँ दे वेहड़े देव ने सब ने नच नच शगन मनाना है,

जेहड़े माँ दे रंग विच रंगे ओ तर जावन गे

जेहड़े माँ नाल करदे प्यार भंगड़ा पावन गये,

सच्ची श्रदा नाल लगाइये आज जैकारे मैया दे,

हर कोई आखे साहनु मसीहा लाल प्यारे मैया दे,

जेहड़े नाम दी धुन विच खो गये माँ नु पावन गे,

जेहड़े माँ नाल करदे प्यार भंगड़ा पावन गये,

बन के चले कमले रमले खुश मियां नु कर लइये,

आओ सरे मिल के आप माँ दी हज़ारी भर लिये,

जेहड़े बन गये माँ दे योगी भेटा गावन गे,

जेहड़े माँ नाल करदे प्यार भंगड़ा पावन गये,

संगना से शर्माना कोई नहीं रल मिल सब ने नचना है,

मस्ती दे विच खो के सागर माँ दे दिल नु जचना है,

जेहड़े मन गे मेरी बात ओ भाग जगावण गे,

जेहड़े माँ नाल करदे प्यार भंगड़ा पावन गये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।