तेरी महिमा पार शंकरा कैसे करू उचारण

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इक हाथ तिरशूल विराजे इक हाथ में डमरू साजे,

गल सर्पो की माला सोहे जटा में गंगा धारण,

तेरी महिमा पार शंकरा कैसे करू उचारण,

तीन लोक के मालिक तुम हो इस लिए तू त्रिलोकी,

आई धरा पर बहती गंगा जटा में अपने रोकी,

तू विशधर है तू गंगधर है कितने तेरे उधारण,

तेरी महिमा पार शंकरा कैसे करू उचारण,

भस्मा सुर को भोले पण में आकर के वरदान दियां,

पल में प्याला विश का पी कर देवो का समान किया,

तेरे नाम का सुमिरन करते खुद लंका के रावण,

तेरी महिमा पार शंकरा कैसे करू उचारण,

नाम तेरा गूंजे है जग में जय बाबा बर्फानी,

भूखे को आन देने वाला और प्यासे को पानी,

कृष्ण रसियां तुझे मिलने का ढूंढे कोई कारण,

तेरी महिमा पार शंकरा कैसे करू उचारण,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।