आके देख तो हाल मुरली वाले नन्द लाल

पारंपरिक
महादेव गुरु वाणी शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे दुःख हारी दीं दयाल दिन दिन समय बदल रहा चाल,

आके देख तो हाल मुरली वाले नन्द लाल,

हे दुःख हारी दीं दयाल

इस दुनिया में भले आदमी खाते फिरते ढके,

ऐशो इशरत मुज उड़ाते डाकू चोर चके,

लेते लूट पराया माल दुखी है वेचारा कंगाल,

आके देख तो हाल मुरली वाले नन्द लाल,

रामायण गीता गुरु वाणी कोई कोई पड़े विचारे,

छोटे छोटे बच्चे भी है गाते फ़िल्मी गाने,

जिनकी उम्र नहीं दस साल फिरते मुँह में सिगरेट डाल,

आके देख तो हाल मुरली वाले नन्द लाल,

रोज सिनमा वे पर देखो तो भीड़ लगी रहे भरी,

गुरु द्वारे एक ग्रंथी बैठा मंदिर एक पुजारी,

भजाये नित शंख गदयाल,

पर कोई न उधर ख्याल,

आके देख तो हाल मुरली वाले नन्द लाल,

ढोल रही है फिर से ढ़ग मग इस भारत की नैया,

देर न कर अब जल्दी आजा प्यारे कृष्ण कन्हियाँ,

नहीं तो तेरे दर पे लाल तभी कर देगा भूख हड़ताल,

आके देख तो हाल मुरली वाले नन्द लाल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।