बाबा जी दया करना

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा जी दया करना के तेरी मेरी तोड़ निभ जावे,

तेरे बच्चियां न भूल के भी कदे अभिमान ना आवे,

जे सुख देवे कदी न हसा ,

जे दुःख देवे कदे न रोवा ,

बस इतना ख्याल जरूर रखना के बच्चा तेरा डोल न जावे,

बाबा जी दया करना के तेरी मेरी तोड़ निभ जावे...

तेरे चरना दे विच मैं रहा ते भूल जावे मैनु एह सारा यहां ,

ऐसी मस्ती च रंग देना के रंग कोई होर न आवे,

बाबा जी दया करना के तेरी मेरी तोड़ निभ जावे,....

जदो देखा मैं मुख तेरा ते टूट जावे हर दुःख मेरा,

हूँ जल्दी आ दर्श देना की दिल मेरा तरले तनु पावे,

बाबा जी दया करना के तेरी मेरी तोड़ निभ जावे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।