तम्बू में न रहो मेरे राम जी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तम्बू में न रहो मेरे राम जी मेरे घर आ जाओ,

जो रुखा सूखा दिया आप ने भोग लगाओ,

प्रभु घर आ जाओ,

तम्बू में न रहो मेरे राम जी मेरे घर आ जाओ,

आ गहतो प्रत्याघातो से दुःख होता होगा आप को भी,

औलादे अगर नकमी हो तकलीफ हो माँ बाप को ही,

हम आप की ही संताने है प्रभु राह दिखो मेरे घर आ जाओ,

तम्बू में न रहो मेरे राम जी मेरे घर आ जाओ,

क्या सोच के इस जग की रचना प्रभु आप ने आखिर तर डाला,

मानव ही आप को भाहता है मानव ने ही बेघर कर डाला,

यदि आप की ये कोई लीला है प्रभु हमे बताओ मेरे घर आ जाओ

तम्बू में न रहो मेरे राम जी मेरे घर आ जाओ,

कट गरे में आप को खड़ा देख आँखों से आंसू बहते है,

दिक्कार है ऐसे जीवन पर जज्बात यही अब कहते है,

दिवाकर के इस व्यथित हिरदये को धीर धराओं, मेरे घर आ जाओ

तम्बू में न रहो मेरे राम जी मेरे घर आ जाओ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।