मेरे मलका मेरे प्यारेया हाथ जोड़ के अरदास मैं करा

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे मलका मेरे प्यारेया हाथ जोड़ के अरदास मैं करा,

दासा दी मन अरदासा कर पूरियां सब दियां आसा,

मैं प्राथना करा,

मेरे मलका मेरे प्यारेया हाथ जोड़ के अरदास मैं करा,

उठ दे बहन्दे अरदास करा,

सोहन्दे जगदे अरदास करा,

चल दे फिरदे अरदास करा

हर दम दर दे अरदास करा,

इक मन होके अरदास करा,

हास्के रो के अरदास करा,

रेहमत दा मीह बरसादे,

दुःख दर्द कलेश मिटा दे मैं प्राथना करा,

मेरे मलका मेरे प्यारेया हाथ जोड़ के अरदास मैं करा,

ऑखे वेले अरदास करा,

सोखे वेले अरदास करा,

मस्ती विच अरदास करा,

चरनी वेह के अरदास करा

दिल दी कह के अरदास करा,

साहिब तू अंतर यामी जाने हर को बेगनी,

मेरे मलका मेरे प्यारेया हाथ जोड़ के अरदास मैं करा,

दुखिया दे लई अरदास करा,

सुखियाँ दे लई अरदास करा,

गैरा दे लई अरदास करा,

मित्रा लई अरदास करा,

मंदिया लई अरदास करा,

चंगेया लई अरदास करा,

सबना दियां खुशियां मंग ला रंग विच तेरे मन रंग ला मैं प्राथना करा,

मेरे मलका मेरे प्यारेया हाथ जोड़ के अरदास मैं करा,

चरनी लाई अरदास करा,

न ठुकराई अरदास करा,

भरदे सबदि अरदास करा,

नेड़े रखी अरदास करा,

डाटा तू ही अरदास करा,

राखा तू ही अरदास करा,

लख होवे जे मज़बूरी पाई न कदे वि दुरी मैं प्राथना करा

मेरे मलका मेरे प्यारेया हाथ जोड़ के अरदास मैं करा,

सेवक बन के अरदास करा,

निष्ये करके अरदास करा,

तेरा होके अरदास करा,

तुझ विच खो के अरदास करा,

मैं मैं छड़ के अरदास करा,

झोली अड़ के अरदास करा,

साहिब मैं तेरा हो जावा कुज होर प्रीत न चावा,

मेरे मलका मेरे प्यारेया हाथ जोड़ के अरदास मैं करा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।