माँ दर्शन का फल ना मिलता

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

माँ दर्शन का फल ना मिलता कोनया भैरव नाथ बिना,

बाला जी बजरंग बलि मिले कदे न रघुनाथ बिना,

माँ के दर्शन करके आओ फिर भैरव पर तेल चढ़ाओ,

भगति तद भी रंग लावे न खुद की करि खुबात बिना,

माँ दर्शन का फल ना मिलता कोनया भैरव नाथ बिना,

प्रेत राज समाधि वाला भैरव ोटे काम्बर काला,

बाला जी भी चाले को न इन तीनो के साथ बिना,

माँ दर्शन का फल ना मिलता कोनया भैरव नाथ बिना

कोइये कहता यो मरघट वाली कोई मसानी कहता काली,

भोग लगावे नहीं कालका,माई आधी रात बिना,

माँ दर्शन का फल ना मिलता कोनया भैरव नाथ बिना

अर्धकवारी माँ मनसा रानी सतपाल भगत ने दिन रात मखानी,

माँ अशोक भगत भी के गावे माहि रानी के साथ बिना,

माँ दर्शन का फल ना मिलता कोनया भैरव नाथ बिना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।