मंदिर जो बालक नाथ का लाखो में एक है

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॥ पावन पाठ ॥

मंदिर जो बालक नाथ का लाखो में एक है,

मंदिर जो इक निवास लाखो में एक है,

मंदिर का सेवादार जो हर बंदा नेक है,

मंदिर जो बालक नाथ का लाखो में एक है,

पाना है उसका प्यार तो चरणों को थाम लो,

ज्योति जगा के रात दिन बाबा का नाम लो,

मंदिर जो बालक नाथ का लाखो में एक है,

मांग लो मिले प्यार यहाँ है सुखो का भंडार याहा,

लेकर के सच्ची भावना दरबार जो गया,

निर्धन जो दर पे आ गया धन वान हो गया,

मंदिर जो बालक नाथ का लाखो में एक है,

देते है भगत रोट जो बाबा के नाम के,

जा ते है भर के झोलियाँ बाबा के धाम से,

मंदिर जो बालक नाथ का लाखो में एक है,

दर आ गया सोहनी पटी वाला उसके नाम की जो फेर ता है माला,

कहते है मंदिर जोगी का तख्तो का ताज है,

महिमा सुनाता है सौरव मंदिर की आज है,

मंदिर जो बालक नाथ का लाखो में एक है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।