सरियाँ तो सोहना मेरा नाथ जो है

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॥ पावन पाठ ॥

सरियाँ तो सोहना मेरा नाथ जो है,

हर पल रेह्न्दा मेरे नाल जो एह,

क्यों जोगी तो क्यों बाबे तो,

दूर रहा मैं ता हर वेले नाम जोगी दा लवा,

जय बाबे दी कहा सरियाँ तो सोहना मेरा नाथ जो है,

हर पल रेह्न्दा मेरे नाल जो एह,

योगी दे ता दर दी शान निराली है,

मुहो माँगियां पान मुरादा सवाली है,

डूबे वेहड़ियाँ न योगी मेरा तार दा है,

दुःखा पीड़ा नु भी पला च निवार दा,

क्यों जोगी तो क्यों बाबे तो,

दूर रहा मैं ता हर वेले नाम जोगी दा लवा,

रब दा रूप है बालक बड़ा मनमोहना है,

जोगी मेरे दे वरगा न कोई होना है ,

ऊंचा रुतबा मेरी सरकार दा है,

हॉवे जीहदे बल योगी ओह न हार दा है,

क्यों जोगी तो क्यों बाबे तो,

दूर रहा मैं ता हर वेले नाम जोगी दा लवा,

जोगी दे नाम दा वाना गल विच पाया है,

बिना मंगेया ही जास ने सब कुछ पाया है,

हूँ दुनिया दारी दी साहनु लोड नहीं,

मिल जावे जोगी कोई थोड़ नहीं,

क्यों जोगी तो क्यों बाबे तो,

दूर रहा मैं ता हर वेले नाम जोगी दा लवा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।