मैं कम करदी रेहनी आ मेरी सूरत पीरा दे विच रेहँदी

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॥ पावन पाठ ॥

मैं कम करदी रेहनी आ मेरी सूरत पीरा दे विच रेहँदी,

पीरा दी दरगाह ते जावा झाड़ू फेरा पोचे लावा,

सच्ची शरधा मन विच लेके पीरा दे मैं चिराग जगावा,

जद मैं उठदी बेहनी आ मेरी सूरत पीरा दे विच रेहँदी

पीरा ले मैं नाज बनावा लौंग लेचियां मेवे पावा,

आज पीरा साढ़े घर आउना फुल्ला दे नाल आसान सजोना,

ओह्दी जय जय केहनी आ जय पीरा दी केहन्दी आ,

मेरी सूरत पीरा दे विच रेहँदी......

कोई आख दा कमली मैनु,

कोई आख दा पागल मैनु,

मेरे ले है रब लख दाता,

सच सुनावा सोहनी तनु,

बहुत गल्ला मैं सहनी आ,

मेरी सूरत पीरा दे विच रेहँदी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।