संग तुर पेया वाजेया नाल

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

संग तुर पेया वाजेया नाल आज असि बाबे दे जाना,

झंडे शरदा नाल बनाये बस्सा गाड़ियां मोर सजाये,

पाये भगता दे गला विच हार आज असि बाबे दे जाना,

संग तुर पेया वाजेया नाल......

भागा भरया दिन आज सोहना साल बाद है आया,

बाबा जी ने पाके चिठियाँ भगता नु आप भुलाया,

सारे भेटा गावो रल मिल भंडारा पावो,

ओ है कलयुग दा अवतार आज असि बाबे दे जाना,

संग तुर पेया वाजेया नाल

शाहतलाइयाँ दयोट गुफा ते लगाया मेला भारी,

लें मुरादा बाबा जी तो जान दी दुनिया सारी,

योगी दे भगत प्यारे बोलो बाबे दे जय कारे,

योगी भगता नु वाजा रहा मार,आज असि बाबे दे जाना,

संग तुर पेया वाजेया नाल.....

तड़के उठ के सारी संगत ने मंदिरा दे विच जाना,

रोट चडओने गुफा ओह्दी ते बाबा जी दा दर्शन पाना,

बैठ के चौंकी लानी भगता सिर पौन है आनी,

सोहनी पटी वाला भेटा गाउ नाल आज असि बाबे दे जाना,

संग तुर पेया वाजेया नाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।