साईं नाम की लूट है प्राणी लूट सके तो लूट

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॥ पावन पाठ ॥

साईं नाम की लूट है प्राणी, लूट सके तो लूट

पाछे फिर पछतायेगा जप प्राण जाएंगे छूट

जीवन पर काहे इतराये, यह साँसे तो आनी जानी

काया एकदिन मिट लाएगी जीवन है बस बहता पानी

साईं नाम का प्याला तू पीले, जीवन कड़वा घुट

पाछे फिर पछतायेगा जप प्राण जाएंगे छूट...

मोह माया यह मिथ्या सारी, काम तेरे ना ना आएगी

क्यों अपना समय गवाए साथ न तेरे जायेगी

साईं नाम की माला तू जप ले, सांस जा जाये दूर

पाछे फिर पछतायेगा जप प्राण जाएंगे छूट...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।