मैं बाबा जी दीदार करना

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॥ पावन पाठ ॥

बड़े सुनहे शाहतलाइयाँ वलियाँ तनु कले,

याद तेरी विच योगियां रो रो भर गये मेरे पले,

मैं बाबा जी दीदार करना दिल खींच दा है तेरे वले,

मैं बाबा जी दीदार करना......

सुनिया विच गुफा दे विच लाया है तू डेरा योगियां,

मेरे वल भी मार ले झाती सुन ले दुखड़ा मेरा योगियां,

मैनु नाल ना कोई ले चले,

मैं बाबा जी दीदार करना.....

लोकि जांदे तेरे दर ते मैं एथे कुरलावा योगियां,

इक वारि मैनु कॉल भुलाले विशडे न मर जावा जोगियां,

दे दीदार पा खैर मेरे पले,

मैं बाबा जी दीदार करना....

योगी सूखने चानन करदे मेरी ज़िन्दी हनेर जोगियां,

सारे जग विच कोई न मेरा रोगी वाजो तेरे योगियां,

आखो अथुरु न जाने झले,

मैं बाबा जी दीदार करना.......

तेरी गुफा वाल चेत महीने भर भर जांदियां बस्सा जोगियां,

मेरे दिल दी हसरत मैं भी तेरे चरनी वसा जोगियां,

घर बस न मेरा कोई चले,

मैं बाबा जी दीदार करना

रमन बाबे ने लिखियाँ भेटा किंदी ने है गाइयाँ जोगियां,

खैर झोली विच पा दे संगता दुरो चल के ाइयाँ जोगियां,

सारे जग विच तेरी बल्ले बल्ले,

मैं बाबा जी दीदार करना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।