बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे

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॥ पावन पाठ ॥

बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,

पौणाहारी दा दरबार भगतो खिली होई गुलजार,

संगत बोले जय जय कार जी योगी दर रंग बरसे,

बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,

हर पासे होइया रुषनाइयाँ लगाया भारी मेला,

विच सरावा चौंकियाँ लगन होई शाम दी वेला,

सारी रात जैकारे लगन चिमटा आते ढ़ोलका वजन,

भेटा गा कर न सेवक न रजन,योगी दर रंग बरसे,

बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,

सजिया भी दुकान भगतो आउंदे बड़े नजारे,

रंग बिरंगियां लाईटा जगदियाँ पेंदे ने चमकारे,

हटियाँ वाले होका लांदे देशी घी दे रोट बनाउँदै,

लेजो संगता ताई सुनादे,योगी दर रंग बरसे,

बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,

बाबे दे दरबार दी महिमा सुन तिरलोचन आया,

पटी वाले गोल्डी ताहि अपने नाल ले आया,

बाबे दे दरबार दी महिमा सुन तिरलोचन आया,

जे भी दी ग्रुप सारा शिमले तो आया,

कहन्दे धन धन पौणाहारी तेरी सूंदर गुफा प्यारी,

बाबा पूजे दुनिया सारी,योगी दर रंग बरसे,

बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।