किनी सोहनी लगदी जोड़ी नागा दी

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॥ पावन पाठ ॥

है आस पूजावे जोड़ी नागा दी,

एह किनी सोहनी लगदी जोड़ी नागा दी,

विच बर्मी दे वास एह न दा,

दुनिया करदी जाप एहना दा,

वेखियाँ जन्नत लब्दी जोड़ी नागा दी,

एह किनी सोहनी लगदी जोड़ी नागा दी,

जिथे भी नागा दा पेहरा,

ओथे लगियाँ लेहरा वेहरा,

मथे मणि है जोड़ी नागा दी,

एह किनी सोहनी लगदी जोड़ी नागा दी,

पूजा एहना दी करदे जेहड़े दुःख ओहना दे ऑन न नेड़े,

रूह न देखिया रज दी जोड़ी नागा दी,

एह किनी सोहनी लगदी जोड़ी नागा दी,

दर्शन एहना दा पावे जेहड़ा,

सोनी पार हो जावे वेहड़ा,

करदी रखियाँ जग दी जोड़ी नागा दी,

एह किनी सोहनी लगदी जोड़ी नागा दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।