मेरे जोगी कर्म कमा दिता

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॥ पावन पाठ ॥

थोड़ कोई न छड़ी जोगी औकात तो वध के दे देता,

मेरे जोगी कर्म कमा दिता अम्बरा विच उड़न ला दिता,

मिन्ता तरले पाये सी सब दे पेश कोई न चली सी,

हर था भटक भटक के बाबा चौकठ तेरी मली सी,

कोई नहीं सी बन दा मेरा आज सब नु मेरा बना दिता,

योगी बिना न पूछियां जग ते किसे ने साड़ियां सारा ने,

इक डोर सी सिद्ध जोगी ते होर न किते जाना है,

ऐसी रेहमत होइ नाथ दी मंजिला च फूल महका दिता,

मेरे जोगी कर्म कमा दिता अम्बरा विच उड़न ला दिता,

जो भी बोला सच मैं बोला मेरियाँ एह अरदासा सी,

ऐसी किरपा होइ नाथ दी मिट गइयाँ सब प्यासा सी,

गोल्डी परधट सिद्ध जोगी ने साडा हर इक बोल पूगा दिता,

मेरे जोगी कर्म कमा दिता अम्बरा विच उड़न ला दिता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।