जब से बिहारी जी से नज़र लड़ी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ऐसे नहीं हम चाहने वाले,

जो आज तुम्हे कल और चाहे,

फेंक दियां आंख निकाल के दोनों,

जो और किसी से नजर मिलाये,

लाख मिले तुमसे बढ़ कर तुम्हे ही चाहिए और तुम ही मनाये,

जब तक तन में प्राण है तब तक नाता निभाएं,

जब से बिहारी जी से नज़र लड़ी है,

ऐसा नशा छा गया है जीने का मजा आ गया है,

बन गई तेरे नाम की जोगन,

छोड़ दियां जग सारा,

अब तो चैन मिले मोहे तब ही,

मिली जो प्रीतम प्यारा,

तुझबीण अब तो लगता नहीं दिल,

दिल को तुहि भा गया है ,

जीने का मजा आ गया है,

यह अग्नि तुम्हारी लगाई हुई,

बिना आप के भुजाये गा कौन,

परिवार कुटंब नाता था

उनमे हमको अपनाएगा कौन,

श्री कृष्ण दया निधि को ताज के ,

दुखियो पे दया बरसाए गा कौन,

अब प्रीतम प्यारे तुम्हारे बिना इस दास को गले लगाए गा कौन,

साहिब से जो इश्क़ हुआ तो,

दुनिया से कया लेना,

जो दौलत हमने पा ली है,

दौलत और कही न,

अब तो किसी से लगता नहीं दिल,

दिल को व्ही भा गया है,

जीने का मजा आ गया है,

मालिक के अनदेखे घर का,

कौन पता बतलाये,

पंडित पूर्व बोले वो,

मुल्ला पक्षिम ले जाये

छोड़ दिया दर दर का भटकना,

खुद में उसे पा लिया है,

जीने का मजा आ गया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।