गुरु हुंदे रूप रब दा

पारंपरिक
अन्य भजन बावा लाल दयाल भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गुरु हुंदे रूप रब दा

ऐना गुरुआ दा मान वधाईये, गुरु हुंदे रूप रब्ब दा

मीठी मीठी बानी बोले, सत्गुरु प्यारे जी

गुरुआ दे दर्शन दुखड़े निवारे जी

गुरु नाम वाला जाम पी जाइए,

गुरु रूप हुंदे रूप दा...

गुरु नु ब्रह्मा केहन्दे गुरु नु महेश जी

गुरुआ दे हुंदे सारे सच्चे उपदेश जी

एहना गुरुआ दी जय जय बुलाइये,

गुरु हुंदे रूप रब दा...

वैर मिला के यह ते प्यार सीखण्डे ने

विछड़िया रूह नु यह आप मिलन्दे ने

एहना गुरूआं नु मन च बसाइये,

गुरु हुंदे रूप रब दा...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।