साथी हारे का तू मुझको भी जताने आजा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साथी हारे का तू मुझको भी जताने आजा,

तू मेरी लाज को लूटने से बचाने आजा,

रिश्तो के खेल से रिश्तो से ही हारे है,

अपने के बीच में रह कर भी बेसहारे है,

कैसे जियुगा यु घुट घुट के तमाशा बनके,

कैसे पियुगा मैं अस्को को कन्हैया हस्के,

मैं हु तेरा ये ज़माने को बताने आजा,

तू मेरी लाज को लूटने से बचाने आजा,

मेरी लाचारी पे दुनिया भी सताती है मुझे,

ऐसे में बेबसी भी मेरी रुलाती है मुझे,

इस से पहले की ज़माने में हसी हो मेरी,

तेरे ऊपर भी उठी ऊँगली हो बदनामी तेरी,

अपनी मैया जी के वचनो को निभाने आजा,

तू मेरी लाज को लूटने से बचाने आजा,

हारे का साथ देते हो तुम सुना है हमने,

हार के ज़िंदगी से तुम को चुना है हमने,

आखिरी आस बस इस दिल में तेरी बाकि है,

तेरी रेहमत की इक नजर ही प्रभु बस काफी है,

मोहित की ज़िंदगी हाथो से सजाने आजा,

तू मेरी लाज को लूटने से बचाने आजा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।