कठै जाऊ किनने जाके

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कठै जाऊ किनने जाके दुखड़ा सुनाऊ,

तू भी न सुने तो बाबा कौन ने सुनाऊ,

कठै और जाऊ ,

समजे सुने न कोई अर्ज लगाऊ,

तू भी न सुने तो कौने सुनाऊ,,

कठै जाऊ...

रिश्ता तो कई माहरा अपना न कोई,

मैं दीवाना दर्द न जानो मेरो कोई,

किन किन के आगे मैं अपनी झोली मैं बिशाऊ,

तू भी न सुने तो कौने सुनाऊ,,

कठै जाऊ...

दुनिया की बेठियो बेठियो बिगड़ी बनावे,

लिख्यो के भी विद्याता मेरे समज नहीं आवे,

मैं भी कोनिया चाहु तेरे आंसुड़ा बहाउ,

तू भी न सुने तो कौने सुनाऊ,,

कठै जाऊ...

लेहरी हु बाबा हीरा मोती न मांगू,

जगह दे चरना में कुछ भी न मांगू,

लिख वा वे तू ही तेरी ही किरपा है गाऊ,

तू भी न सुने तो कौने सुनाऊ,,

कठै जाऊ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।