तेरे नखरे ता दुनिया तो वखरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वे कान्हा झले नहीं जांदे मेथो तेरे नखरे,

तेरे नखरे ता दुनिया तो वखरे,

मैं नि केहंदा राधा झल तू मेरे नखरे,

मेरे नखरे ता दुनिया तो वखरे,

निकी निकी गल ते तू रूस रूस बेहंदा है,

चौहंदा है की तू न कुझ मुहो कदी कहना है,

मैं कर कर मिन्ता भी गई थक वे,

तेरे नखरे ता दुनिया तो वखरे,

जे तू चावे तेरे कहे उठा बैठा हसा मैं,

तेरे ईशाराया ते दिन राति नचा मैं,

मेथो होनी नि गुलामी रह तू परे परे,

मेरे नखरे ता दुनिया तो वखरे,

केहड़ा तेरे बिन कदी हुकम चल्या है,

मेरा कसूर तनु तनु दिल च वसाया है,

रहा जंदा नहीं तेथो देवी पल वख वे,

तेरे नखरे ता दुनिया तो वखरे,

आखदे कदी मैनु बंसी बजोन नु,

करदी जिद कदी रास रचोन नु,

क्ले क्ले ज़िद तेरी मैनु अखरे,

मेरे नखरे ता दुनिया तो वखरे,

सुन ले यशोदा मैया कान्हा नु मनाने ले तू,

हर वेहले लरह दा है एहनु समजा ले तू,

गला मिठिया वि दास नाल करया करे,

एह्दे नखरे ता दुनिया तो वखरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।