समाधि लाके भोला बह गया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

साहड़े राजा जी दे बाग विच आके

समाधि लाके भोला बह गया

भोला बह गया शम्भु बह गया

कोई कहन्दा गोरजा वियाहन नु आया है

ना कोई कोड़ी ते रथ लेके आया है

बुडे बैल उत्ते करके सवारी

समाधि

कोई इसनु भोला कहन्दा कोई त्रिपुरारी है

ना कोई घर येह्दा ना कोई अटारी है

सारी धरती नु अपना बनाके

समाधि

लमी लमी दाहडी इस्दी लमी जटा है

आग दे अंगारिया वांगू इस्दिया निगाह है

हाथ डमरू ते सांप गल पाके

समाधि

कोई नही जाने इस भोले दी माया है

उसदी धुप ते उसदी ही छाया है

सारी दृस्टि दा चक्कर चलाके

समाधि

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।