बाबा जी तेरे एह कुण्डलु कुण्डलु बाल

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा जी तेरे एह कुण्डलु कुण्डलु बाल,

मुख पर बनी बनी बोहनदे हो,

बाबा जी तेरा शाहतलियां वास मोर सवारी करदे हो,

बाबा जी तुसा सती दे अवतार बड़े पार करदे हो,

ओ बाबा जी तेरे एह कुण्डलु कुण्डलु बाल,

बाबा जी साहनु दो चरण दा प्यार नित नाम तेरा जपदे हो,

बाबा जी तेरे एह कुण्डलु कुण्डलु बाल,

बाबा जी तनु पूजे सारा संसार झोलियाँ सब दी भरदे हो,

बाबा जी तेरे एह कुण्डलु कुण्डलु बाल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।