कभी अपनी माँ का तू दिल न दुखाना

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॥ पावन पाठ ॥

माँ की दुआवों से ही चले ये ज़माना,

कभी अपनी माँ का तू दिल न दुखाना,

ये ममता का फ़र्ज़ है बेटे का फ़र्ज़ है तुझको पड़े गा चुकाना,

माँ की दुआवों से ही चले ये ज़माना,

तुझे इस दुनिया में लाइ है माँ,

तू रोया है दूध पिलाई है माँ,

ये ममता का अंचल ओढ़ाई है माँ,

ऊँगली पकड़ कर चलाई है माँ,

वो बचपन के दिन तू अपने भूल न जाना,

कभी अपनी माँ का तू दिल न दुखाना,

दोबरा न दुनिया में मिलती है माँ,

तुम्हारी ख़ुशी से ही खिलती है माँ,

तुम्हे चोट आये तो रोती है माँ,

भगवान से बढ़ के होती है माँ,

पुकारे गी माँ तो पंकज दोहड़े चले आना,

कहे अनु बेटे का तू फर्ज निभाना,

कभी अपनी माँ का तू दिल न दुखाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।