जोगियां दे कोई वि नहीं घर बार

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॥ पावन पाठ ॥

एह ले मैया सामब गौआँ सामब कारोबार,

नाल सामब रोटियां ते लस्सी दा भण्डार,

जोगियां दे कोई वि नहीं घर बार,

तेरा एहसान बारा घड़ियाँ दा चुकाया है,

तनु ही नहीं मैं सारे जग न विखाया है,

छड़ मेरा राह सेह ले गमा दी तू मार,

जोगीआ दे कोई नी घर भार...........

तेरे नाल नहीं किता माँ मैं कोई छल,

फिर भी सुनाये माये मैनु रोटियां दी गल,

जो मिलिया सी तेथो हूँ ओ सामब ले प्यार,

जोगीआ दे कोई नी घर भार......

अस्सा शाह तालियां विच मुड़ नहियो आना,

कलयुग विच लाल तेरा ही कहना,

एहना ही सी कहना मेरा एहना ही सी सार,

जोगीआ दे कोई नी घर भार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।