बाबा असि ता मौजा करदे हां

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा असि ता मौजा करदे हां,

तेरियां द्वितीया दाता ते,

तेरियां दितियाँ सौगात ते,

बाबा असि ता मौजा करदे हां

प्यार दिखाया तुसी माँ पे बनके,

लाड लड़ाया भर भर के,

बचपन दे दिन बीते साढे वदिया मौजा कर कर के,

बाबा असि ता मौजा करदे हां.....

कारा गड्डियां घर विच खड़ियाँ दितियाँ दाता तू भेटा बड़ियाँ,

विच आसमानी उडी फिरदे दुनिया दी तू सैरा करदे,

असि ता मौजा करदे हां तेरियां दतियाँ दाता ते .........

इक दाता मेरी विनती सुन ले चरना दे विच मैनु रख ले,

छड़ी न तू डोर रमन दी मिन्ता तेरियां करदे,

बाबा असि ता मौजा करदे है ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।