खैर झोली विच पुत्र दी पा दे

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॥ पावन पाठ ॥

खैर झोली विच पुत्र दी पा दे तानिया तो जग दे बचा दे,

मैं मंगदी नि मैल माड़ी आ,

खैर झोली विच पुत्र दी पा दे

खाली झोली लेके पीड़ा दर तेरे आई आ,

मोड़ी न तू खाली एह आस लेके आई आ,

लाल झोली विच मेरे भी खिड़ा दे एह जग च रला दे,

मैं मंगदी नि मैल माड़ी आ,

खैर झोली विच पुत्र दी पा दे

लखा ही तू मावा दियां झोलियाँ भरियाँ,

मेरी वारि कातो पीड़ा दरदा अडिया,

सूखे रुखा न फल हूँ ला दे ते बिगड़ी बना दे,

मैं मंगदी नि मैल माड़ी आ,

खैर झोली विच पुत्र दी पा दे

भेना नु तू वीर लाल मावा नु एह वंडदा,

रमन भी वीरा तेरे दर तो है मंगदा,

हरिंदर किंदी तेरा नाम ध्यावे के दर तेरे आवे,

मैं मंगदी नि मैल माड़ी आ,

खैर झोली विच पुत्र दी पा दे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।