बाला ल्या दे रे संजीवन

सौरभ मधुकर
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

थारो राम बिलखै

थारी बाट निरखै

भाई लाडलो जमीन ऊपर सोय रयो

बाला ल्या दे रे संजीवन,मनड़ो रोय रयो

नाही कोई दिन देख्यो

देखि नाही रात नै

बन बन सागे डोल्यो

आंधी बरसात में

म्हारे कालजे रो कोर सुध खोय रयो

बाला ल्या दे रे संजीवन,मनड़ो रोय रयो

रघुकुल री आन ताईं

लड़यो मेघनाथ स्यूं

जुल्मी ने शक्ति मारी

धोके और घात

रात बीत्यो जावै,इब तो भोर होय रयो

बाला ल्या दे रे संजीवन,मनड़ो रोय रयो

थारे सिवा बाला किनै दुःखड़ो सुनाऊ मैं

दुनियां ने हर्ष कैयां मुखड़ो दिखाओ मैं

म्हारी लाज थारे हाथां माहि सौप रयो

बाला ल्या दे रे संजीवन,मनड़ो रोय रयो

थारो राम बिलखै

थारी बाट निरखै

भाई लाडलो जमीन ऊपर सोय रयो

बाला ल्या दे रे संजीवन,मनड़ो रोय रयो

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।