पौनहारियाँ गुलाब देया फुला

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॥ पावन पाठ ॥

पौनहारियाँ गुलाब देया फुला मैं रखा तनु सामब सामब के,

तनु नजर मेरी न लग जावे मैं तका तनु सामब सामब के,

रोट प्रशाद बाबा तेरे लई बनावा आसान ते बिठा के मैं तनु भोग लगावा,

रखी तपदा गरीबा दा भी चुल्ला मैं रखा तनु सामब सामब के,

पौनहारियाँ गुलाब देया फुला मैं रखा तनु साम्ब साम्ब के,

सरिया ते सोहना है तू सच्ची गल दस्सा मैं,

तेरे बिना किसे नु न तकदियां ने अखा,

बाबा तेरे उते चित मेरा ढुला,मैं रखा तनु सामब सामब के,

पौनहारियाँ गुलाब देया फुला मैं रखा तनु साम्ब साम्ब के,

किती कुर्बान मैं जींद जान तेरे उते,

सिद्ध जोगी मेरे भी जगावी भाग सुते,

देवी चरना दा प्यार अंमुला मैं रखा तनु सामब सामब के,

पौनहारियाँ गुलाब देया फुला मैं रखा तनु साम्ब साम्ब के,

नाथा दा नाथ तू तनु सारा जग ध्यावे,

सदा तेरी प्रीत बलिहार महिमा गावे,

राणे बॉबी नु दीदार देवी खुला मैं रखा तनु सामब सामब के,

पौनहारियाँ गुलाब देया फुला मैं रखा तनु साम्ब साम्ब के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।