जपले साई राम

पारंपरिक
श्री राम भजन साईं भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कल कल करते ही सारा ही ये जीवन निकल चला,

अब तो तू एह मूरख बंदे करले काम भला.

जपले साई राम जपले साई राम जपले साई राम,

आज नहीं मैं कल कर लूंगा समय गवाया खूब,

कौन से पल में थम जाए सांसे,बात गया तू भूल,

कब जाने दिखलादे,तुझको पगले मौत कला,

अब तो तू एह मूरख बंदे करले काम भला.

जपले साई राम जपले साई राम जपले साई राम,

पत्थर जैसे जीवन को तू हीरा मान रहा,

माया की इस नगरी को तू सच्ची जान रहा,

वक़्त के आगे एक चले न सब ने हाथ मला,

अब तो तू एह मूरख बंदे करले काम भला.

जपले साई राम जपले साई राम जपले साई राम,

तेरा सिक्का नहीं चले गा चाहे चलाके देख ले,

कान खोल कर सुन ले मूरख मेरी बात इक रे,

सुबह का सूरज होते होते होते सांज ढला

अब तो तू एह मूरख बंदे करले काम भला.

जपले साई राम जपले साई राम जपले साई राम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।