मेरी माता दे दरबार ज्योता जाग रहियाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी माता दे दरबार ज्योता जाग रहियाँ,

शेरावाली दे दरबार ज्योता जाग रहियाँ,

ऊंचे पीपल पींगा पाइयाँ ने,

उतो वेडा झूटन आइया ने,

सब झुटन बारो बार ज्योता जाग रहियाँ

तेरी भेटा पान सुपारी माँ,

मेरी माता कांगड़े वाली माँ,

तेरी हो रही जय जय कार,

ज्योता जाग रहियाँ....

कोई अन मंगे कोई धन मंगे,

हर कोई अपनी मंग मंगे,

देव ,डोगरा मंगदा है माँ दा प्यार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।