जो देते लहू वतन को

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॥ पावन पाठ ॥

जो देते लहू वतन को,

जो महकाते उपवन को,

उन्हें शत शत परनाम मेरे देश का,

उनको सो सो सलाम मेरे देश का,

धरती को स्वर्ग बनाने माटी का कर्ज चुकाने,

जो कदम बढ़ाते है रक्शा का भोज उठाने,

जो मर कर भी जी ते है जो विश हर दम पीते है,

उन्हें शत शत परनाम मेरे देश का,

उनको सो सो सलाम मेरे देश का,

जो धीर वीर व्रत धरी वो सच्चे देश पुजारी,

इतहास वोही रचते है जिनका जीवन उपकारी,

जो दिल में रखे लग्न को वो पूरा करे सपन को,

उन्हें शत शत परनाम मेरे देश का,

उनको सो सो सलाम मेरे देश का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।