सलाम उन शहीदो को जो खो गये

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॥ पावन पाठ ॥

सलाम उन शहीदो को जो खो गये,

वतन को जगा कर जो खुद सो गये,

वो थे लाडले अपनी मायो के पाले,

मगर हो गये गोलियों के हवाले,

आज़ादी के बदले जवानी लूटादि,

वतन के लिया जान की बाजी लगा दी,

हमारे थे अब देश के हो गये,

वतन को जगा कर जो खुद सो गये,

हिन्दू सिख मुसिलमान थे सलाम उनको जिनकी वो संतान थे,

सलाम जो बात ये कह गये के बेटा गया है वतन तो रहे,

जुड़ा हो के हम से वो खो गये,

वतन को जगा कर जो खुद सो गये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।