मेरे साई का चोला मन को भाये

पारंपरिक
माँ गंगा भजन साईं भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे साई का चोला मन को भाये,

सादा सलोना दिल को लुभाये,

गंगा की लेहरो जैसा ये पवन लागे,

बर्फीले पर्वत जैसा ये शीतल लागे,

है सब से निराला शोभा बिखराये,

सादा सलोना दिल को लुभाये,

है चमक अनोखी प्यारी जैसे सूरज चमके,

चंदा सा करे उजाला ये चांदनी बन के,

साई चोला सफ़ेद पहन के जग रंगीन बनाये,

सादा सलोना दिल को लुभाये,

साई बाबा का मेरे है कफनी चोला,

क्या भेद है इसका जाने मेरा साई मौला,

साई पहने सुदी रेशम न भाये,

सादा सलोना दिल को लुभाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।